भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। जो मंजिलों को पाने की चाहत रखते वो समुन्दर पर भी पत्थर के पुल बना देते है। यह शायरी शहर के युवा मनोज कुमार पर सटीक बैठती है जिसने डॉ भीमराव अंबेडकर की जीवन और उनके संघर्ष को दर्शाने की कोशिश अपनी एक कलाकृति के माध्यम से की है। इस कलाकृति को देखकर प्रथम दृष्टया यह एक धुंधली तस्वीर प्रतीत होती है। मगर इसको सही रूप में देखने के लिए आंखें खोलने की नहीं बल्कि आंशिक रूप से बंद कर की जरूरत होती है।
मनोज कुमार ने डॉ अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उनके संघर्ष को अपनी पेंटिंग के ज़रिये उकेरा है। यह मात्र पेंटिंग नहीं बल्कि उस सम्मान की बानगी है जो करोड़ो भारतीयों के मन में डा अंबेडकर के प्रति स्वतः है। भारत के सविंधान निर्माता के रूप में याद किये जाने वाले डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन, 14 अप्रैल, पूरे देश में अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है।
डॉ अम्बेडकर की 130 वी जयंती पर कलाकार मनोज ने अपनी अस्पष्ट कला के माध्यम से डॉ भीमराव अंबेडकर की पेंटिंग बनाई। करीब 20 दिन की कड़ी मेहनत और दो हज़ार की लागत से बनी ये पेंटिंग मनोज की कला का एक आयाम मात्र है। मनोज पिछले 16 वर्षों से कला की इस विधा से जुड़े हुए है। जनता इंटर कालेज के छात्र रहे मनोज ने छठी कक्षा में ही तत्कालीन राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम का दिल जीत लिया था। पंतनगर में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में 400 बच्चों में चयनित मनोज ने चावल के दानों से ताज महल और शहीद उधम सिंह का चित्र बनाकर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम से स्नेह प्राप्त किया। आज ऐसी कई कलाकृतियां बना चुके मनोज अपनी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए प्रयासरत है। मनोज ने फाइन आर्ट्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। मनोज अपनी कला के माध्यम से अपनी माता और देश को गौरवान्वित करना चाहते है। वह अपनी सम्पूर्ण कला का श्रेय अपनी माँ की मेहनत को देते है की उनके बल पर ही आ वह इस मुकाम पर है।
पेंटिंग की जानकारी देते हुए मनोज ने बताया की इस पेंटिंग को करीब 6 से 10 फीट की दूरी पर खड़े रहकर और अपनी आँखों को 70 प्रतिशत तक बंद करके सम्पूर्ण रूप से साफ़ देखा जा सकता है। मनोज ने बताया की पेंटिंग में 6 रंगो का इस्तेमाल किया गया जिसमे 970 खाने है |



