भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत शून्य बैलेंस पर खाता खुलवाने को सुविधा जनमानस को दी गयी थी। जिससे अधिकतम लोगो के खाते बैंको में खुले । सरकार की ये योजना सरकारी बैंकों तक ही सीमित रह गयी है। जबकि निजी बैंको में खाता धारक बनना मध्यम और गरीब तबके के लोगों के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।
निजी बैंको के तेज सर्विस और अन्य सुविधाओं के लिए व्यक्ति निजी बैंकों में खाता खुलवाने के विकल्प को चुनता है। पर बैंक पहुँचने के बाद उससे उसकी मासिक आय, खाता में होने वाले लेन- देन के बारे में पूछा जाता है। लोगो के मुताबिक कर्मचारियो का ये बर्ताव ऐसा प्रतीत होता है कि ग्राहक अपना खाता खुलवाने नही बल्कि बैंक से कर्ज मांगने आया है।
निजी बैंक में खाता खुलवाने आई आँचल ने बताया कि बीते एक वर्ष से सभी वर्ग की आमद में कमी आई है। जिसकी वजह से लोग धन संचय नही कर पाए है। ऐसे में मध्यम वर्गीय लोगो के लिए निजी बैंक में खाता खुलवाना किसी सपने से कम नही।
निजी बैंक में खाता खुलवाने आये विनोद के मुताबिक आज के समय मे 10 हजार रुपये की नौकरी मिल पाना बेहद ही मुश्किल है ऐसे में 10 हजार रुपये खाता खुलवाने के लिए दे पाना किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। शून्य बैलेंस पर खाता खोलने के बावजूद कर्मचारियों का खाता खोलने से मना कर देना साधारण लोगो के साथ सरकार के नियमो को ठेंगा दिखाना है।



