भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। प्रभु ईसा मसीह के पुनरुत्थान का पर्व ईस्टर धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर कब्रिस्तानों और चर्चों में प्रार्थना सभा आयोजित की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रार्थना सभा में शिरकत की। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की स्मृति में कैंडल जलाकर प्रार्थना की।
शहर के संत एना, ओल्ड मेथोडिस्ट, सेंट्रल मेथोडिस्ट गिरजाघरों में रविवार को ईस्टर पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान गिरजाघरों में बाइबिल पाठ, प्रवचन, गीत-भजन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया एवं प्रेम, करुणा, सेवा, क्षमा और सहिष्णुता के देवपुत्र ईसा मसीह के संदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया गया।
इस संबंध में संत एना चर्च मास्टर जोसफ असी ने बताया कि ईस्टर पर्व देवपुत्र ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने का त्योहार है। तैंतीस ईस्वी को देवपुत्र प्रभु यीशु को पाखंडियों ने गुड फ्राइडे के दिन सूली पर चढ़ा दिया था। लेकिन प्रभु यीशु अपनी मृत्यु के तीसरे दिन पुनर्जीवित हो गए। यह उनके अनुयायियों के लिए सबसे बड़ी खुशी और उल्लास का मौका था। ईस्टर पर्व प्रतिवर्ष गुड फ्राइडे के बाद वाले रविवार को मनाया जाता है। इसके पहले चालीस दिन उपवास का दिन होता है। स्वयं देवपुत्र ईसा मसीह ने भी चालीस दिन उपवास रखा था। सूली पर ईसा मसीह ने यह प्रार्थना की कि वे उन लोगों को क्षमा करें चूंकि उन्हें यह नहीं पता कि वे क्या कर रहे हैं। इस प्रकार प्रभु यीशु ने पूरी दुनिया को प्रेम, करुणा, दया, सहिष्णुता और क्षमा का संदेश दिया।
सभी चर्च में सामूहिक प्रार्थना की गई। इसमें बड़ी संख्या में मसीही अनुयायियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने एक-दूसरे काे ईस्टर की बधाई दी। मौके पर लोगों के बीच मिठाइयां व प्रसाद भी वितरित किया



