Monday, March 16, 2026
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कोविड काल मे संवेदनहीन हुए अफसर

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भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जहां प्रदेश में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत को पार कर चुकी है ऐसे में पीड़ित अथवा परिजन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कोई आशा न रखे। जी हाँ, जिला उधम सिंह नगर में कोरोना के हालात बिगड़ने के साथ ही यहां तैनात अधिकारियों के रुख भी बदल गए हैं। ये अधिकारी इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि परेशानी में इन्हें फोन करने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को सिर्फ घण्टी सुनने को मिलती है।

बता दें कि उधम सिंह नगर की जिलाधिकारी रंजना राजगुरु ने जिले में लॉकडाउन के आदेश कर दिये हैं। साथ ही उन्होंने सभी शहरों व कस्बों में नोडल अधिकारी नियुक्त किये हैं। इन सभी को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि कोरोना पीड़ितों की हर समस्या का निदान किया जाए। मगर लगता है कि जिले की हाकिम के आदेश बहरे कानों पर पड़े हैं। जहां पूरे देश में कोरोना की मृत्यु दर 1.13 प्रतिशत है तो उत्तराखंड में यह बढ़कर 1.41 प्रतिशत पहुंच चुकी है।

अफसर संवेदना भूल चुके हैं। बात जिला मुख्यालय की करें तो जिला अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों का फ़ोन नंबर होने के बावजूद आपको फ़ोन की घंटी जरूर सुनाई देगी। लेकिन फ़ोन पर आपके सवालो का जवाब देने के लिए कोई फ़ोन नही उठाएगा।

कोरोना के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वास्थ्य विभाग का व्यस्त होने लाज़मी है पर कई फ़ोन करने के बावजूद उत्तर आना तो दूर कोई संदेश तक नही भेजना अधिकारियों और कर्मचारियों की बेपरवाही को दिखाता है। यह शोचनीय विषय है कि हेल्पलाइन के नंबर व्यस्त होने के बावजूद कोई मरीज अपने फ़ोन पर कोरोना को लेकर कोई जानकारी लेने चाहे तो विभाग उसका फ़ोन नही उठाएगा । जिससे व्यक्ति सरकारी अस्पताल या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय आने के लिए बाध्य हो जाएगा। यहां विभाग के लोग उसे समय दे या न दे लेकिन व्यक्ति द्वारा की गई छोटी सी चूक उसे कोरोना संकम्रित करने व इसका प्रसार करने के लिए काफी है। जिस पर विभाग अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाते हुए आपको सतर्कता का पाठ ज़रूर पढ़ाने लगेगा।

यहां तक कि नोडल अधिकारी भी फोन नहीं उठा रहे। यह इतना भी दायित्व नहीं समझ रहे कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ी मानवता है।

मैं कोविड पीड़ित हूँ। दो दिन से जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन को फ़ोन मिला रहा हूँ। वह उठा ही नहीं रहे हैं। मुझे होम आइसोलेशन में 12 दिन हो गए हैं। दवाई खत्म हो चुकी है। मुझे पता ही नहीं अब क्या करना है। —- राजीव कुमार, आदर्श कालोनी निवासी

मैं चार दिन से होम आइसोलेशन में हूँ। मुझे कहा गया था कि दवाई की किट मुझे घर पर भेज दी जाएगी। कोई किट नहीं मिली। अब संबंधित नंबरों पर फ़ोन कर रहा हूँ तो कोई उठा नहीं रह। —-इंदर नारंग, निवासी घास मंडी

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