भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। लगभग एक महीने तक कोरोना का भयावह रूप दिखने के बाद अब देश भर से राहत भरी खबरें आ रही हैं। प्रतिदिन तीन लाख से अधिक कोरोना केस सामने आने की रफ़्तार अब मंद पड़ने लगी है। जहाँ कोरोना मरीजों की संख्या में कमी आ रही है तो वहीं इससे होने वाली मृत्यु दर भी पहले से कम हो गयी है। उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में भी कोरोना का कहर कम होता दिख रहा है। कोविड सेंटर के रूप में संचालित हो रहे अस्पतालों में अब बेड की उपलब्धता हो गयी है तो साथ ही शहर के एकमात्र श्मशान गृह में भी प्रतिदिन दहन हो रहे शवों की संख्या में कमी आई है।
अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही तराई के इलाके में में कोरोना महामारी का विकराल रूप देखा जा रहा था। यहां के श्मशानों में चिताओं की आग बुझती नहीं दिख रही थी बात रुद्रपुर की करें तो यहाँ के किच्छा मार्ग स्थित रामबाग श्मशान घाट में चिताएं अनवरत रूप से जल रही थी। रामबाग श्मशान घाट के प्रबंधक सुभाष छाबड़ा के अनुसार बीते लगभग एक माह से यहाँ प्रतिदिन दो दर्जन लोगों के शव का दाह संस्कार किया जा रहा था। हालत इस कदर बेकाबू थी कि नगर निगम ने इस श्मशान गृह के साह लगे मैदान पर बीस प्लेटफार्म वाले एक नए शवदाह गृह का निर्माण कर दिया।
लेकिन अब यह कहर थमता दिख रहा है। श्मशान स्थल का जायजा लेने पर ज्ञात हुआ कि शवों के दाह संस्कार की संख्या में कमी आई है। सुभाष छाबड़ा ने बताया कि अब प्रतिदिन लगभग पंद्रह शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। उनका कहना था कि कोरोना का प्रकोप अभी थमा नहीं है लेकिन उसमे कमी अवश्य आई है।
छाबड़ा के अनुसार इस श्मशान स्थल पर नगर निगम को कोविड-19 मरीजों के अंतिम संस्कार का जिम्मा दिया गया है। इसके अलावा कई सामाजिक संस्थाएं भी मृतकों के अंतिम संस्कार में जुटी है। पूर्व में औसतन रोजाना 10 से 12 कोविड-19 मरीजों की मौत हो रही है, जिसका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत निगम अथवा अन्य संस्थाओं के सदस्य किया जाता है। लेकिन अब यह संख्या घटकर छह से सात मौतों तक आ गयी है। जिससे जाहिर है कि कोरोना का प्रकोप अब थोड़ा कम हो गया है।



