भोंपूराम खबरी, पंतनगर। विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान महाविद्यालय द्वारा भारत का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत सतत कृषि: धान में संतुलित पोषक तत्वों का प्रबन्धन’ विषय पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, लीड-यारा विटा, इंडिया, विनय कुमार शर्मा एवं रीजनल एग्रोनोमिस्ट, यारा फर्टिलाइजर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड प्रदीप सिंह थे।
विनय शर्मा ने हरित क्रांति के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता की पूर्ति करने एवं औद्योगिकरण के कारण कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि रसायनों के संतुलित प्रयोग से खाद्यान्न की उत्पादकता, मात्रा एवं गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। कहा कि सही समय पर उर्वरक की सही मात्रा का प्रयोग करने से फसल में पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उत्पादकता भी बढ़ायी जा सकती है।
प्रदीप सिंह ने बताया कि सतत कृषि का तात्पर्य मृदा, जल एवं वातावरण के संरक्षण के साथ-साथ उत्पादकता बढ़ाना हैं। इसमें पोषक तत्वों की भूमिका अत्याधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। कहा कि विभिन्न पोषक तत्वों की कमी से धान के पौधों में अलग-अलग लक्षण दिखाई देते है जिन्हें पहचान कर किसान को फसल में आवश्यकता अनुसार पोषक तत्वों की पूर्ति करनी चाहिए। उन्होंने मृदा की जांच करने के उपरान्त ही फसल में उर्वरकों के प्रयोग करने पर भी बल दिया।
निदेशक शोध डा. अजित नैन ने कहा कि बढ़ती हुई आबादी की खाद्य पूर्ति को पूरा करने, खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता, अधिक उपज एवं उन्नत आय हेतु किसान रसायनों का अंधाधुध प्रयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयोग में लाये जा रहे कीटनाशकों एवं उर्वरकों के ज्यादा उपयोग से वातावरण, मृदा, वायु एवं जल प्रदूषित हो रहा है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डा. नैन ने कहा कि किसान सत््त कृषि के उपायों को अपनाकर पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य को बिना हानि पहुंचाये गुणवतायुक्त अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकता है।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए इकाई प्रभारी, अखिल भारतीय समन्वित परियोजना, गृह विज्ञान, डा. दीपा विनय ने कार्यक्रम की रूप-रेखा बताई। इस कार्यक्रम में 35 किसानांे के साथ वैज्ञानिक एवं प्रसार कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।



