Monday, March 23, 2026
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दीपावली के लिए सजा बाजार, आपदा का दर्द भूल आगे बढ़े व्यापारी 

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भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर।  प्रकाश का पर्व दीपावली चार नवंबर को है और इसके लिए शहर के बाजार सज गए हैं। हालांकि दस दिन पूर्व आई भीषण बारिश ने व्यापारियों का खासा नुकसान किया है लेकिन बावजूद इसके व्यापारी धनतेरस और दीवाली के मौके पर मुनाफा कमाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। खरीदारों को लुभाने के लिए दुकानों पर भी आकर्षक सामान का भंडार है। बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल भी शुरू हो गई है।

ज्ञात हो कि 18 व 19 अक्टूबर की भारी बारिश के कारण नगर के व्यापारियों का करोड़ों का नुकसान हुआ था। लेकिन व्यापारी इसे भूलकर अब आगे बढ़ रहे हैं। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा का कहना था कि पहले कोरोना और अब प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापारी आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। लेकिन अभी भी व्यापारी वर्ग यह उम्मीद लगाए बैठा है कि दीवाली का पांच दिवसीय पर्व उनके नुकसान को कुछ हद तक पूरा कर देगा।

गुरुनानक ज्वेलर्स के स्वामी विजय वर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद जहां दुर्गा पूजा महोत्सव उत्साह के साथ संपन्न हुआ। वहीं दीपावली पर भी बाजार में उछाल आने की आस जगी है। दो वर्ष बाद फिर बाजारों में रौनक लौट आई हैं। दुकानदार भी ग्राहकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कपड़ों की दुकान से लेकर ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों को आना जाना शुरू हो गया है। लोग खरीदारी में उत्साह दिखा रहे हैं। घरों की साज-सज्जा के लिए हर प्रकार के फूल वाली झालर की खरीदारी शुरू हो गई है।

काशीपुर बाईपास पर इलेक्ट्रानिक्स शोरूम के स्वामी राजीव खुराना ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक आइटम की खरीदारी पर उन्होंने ऑफर के नाम से छूट देने को प्रचार प्रसार करना शुरू कर दिया है। धनतेरस की भीड़ से बचने के लिए अभी आइटम को पसंद करके बुकिग कराने वालों को होम डिलीवरी फ्री दी जा रही है। नए ब्रांड के एलईडी, फ्रिज, एसी की बुकिग भी जोर पकड़ रही है। रंग-बिरंगी झालरों के अलावा वंदनवार (तोरण), लड़ियां, झूमर, रंगोली, लक्ष्मी जी के पैर के स्वरूप, फाउंटेन, प्रतिमाएं, आर्टिफिशियल फूल-पौधों से बाजार सज चुका है।

कोविड-19 महामारी के चलते पिछले दो सालों से मंदी की मार झेल रहे व्यापारियों को इस बार दीपावली पर्व पर काफी उम्मीदें हैं। खासकर धनतेरस, दीपावली पर्व पर अधिकांश लोग सोने व चांदी के आभूषणों के साथ-साथ गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी खरीदते हैं। इसके साथ ही एक-दूसरे को उपहार स्वरूप चांदी के बर्तन, सिक्के व अन्य वस्तुएं देने का प्रचलन भी बढ़ा है।

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