भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस ले आना पर किसान संगठनों एवं समस्त शिविरों में हर्ष की लहर दौड़ गई ।आज महाराजा रणजीत सिंह पार्क में एकत्र हुए विशाल नेताओं विपक्षी दलों एवं समाजसेवियों ने मिष्ठान वितरण का हर्ष व्यक्त किया| किसान नेता तजेंद्र सिंह विर्क नें कहा कि राज्यसभा एडजर्न कर, बहुमत के बगैर, आसंदी की कुटिलता से ध्वनिमत बताकर पास किये कृषि कानून खत्म करने की घोषणा की गई है। यह समस्त किसानों व समर्थन दी रहे संघटनों की जीत है। सिंघु बॉर्डर पर कल एक बैठक कर आंदोलन हेतु आगामी निर्णय लिए जाएंगे।
जिला पंचायत सदस्य लखबीर सिंह लक्खा नें कहा कि सारे आंदोलनकारी किसान खालिस्तानी आतंकी बताये गए। उन्हें देशद्रोही कहा, पाकिस्तान भेजा। दिन रात टीवी पर बेशर्म बहसें चली। पुलिस के सामने गुंडों ने किसानों पर पत्थर बरसाए। लाठियां भांजी, पानी फेंके। किसान नेता बदनाम किये गए, उनके टेंट जलाए गए, सात सौ से उपर लाशें गिरी। क्या कानून इससे पहले वापस नहीं हो सकते थे?
कांग्रेस नेता सुशील गाबा नें कहा कि इस कानून वापसी के लिए देशभर के किसान भाइयों के संकल्प को सलाम प्रेषित करते हैं। ये कानून वाप्सव्व सरकार की दरियादिली नहीं, किसानों की दृढ़ता का नतीजा है। लेकिन सवाल यह है कि किसान आंदोलन में मारे गए करीब 800 लोगों का दोषी कौन है? क्या सरकार किसानों की मौत पर संवेदना व्यक्त करेंगी? क्या मृतक किसानों के परिवारों को मिलेगा न्याय?
जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष संदीप चीमा नें कहा कि पांच साल से देश पैरालिसिस की अवस्था मे है। हर तरफ कॉन्फ्लिक्ट है, शोर है, नंगई है। नोटबन्दी ने जनता को लूटा तो जीएसटी ने राज्य सरकारो को कंगाल कर दिया। जीवन स्तर गिरा है, सेवाओ की गुणवत्ता गिरी है, विमर्श का स्तर गिरा है।
इस दौरान दिनेश पंत, अमन ढिल्लों, साहब सिंह सेखों, जसबीर सिंह ढिल्लों, गुरजीत सिंह, ओंकार सिंह ढिल्लों, गुरनाम सिंह, सलविंदर सिंह, संतोख रंधावा, उमर खान, सोनू खान, आदि उपस्थित थे।



