भोंपूराम खबरी,पंतनगर। राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (यूकॉस्ट) और उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा पंतनगर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सहयोग से प्रदेश के जल स्रोतो की जल गुणवत्ता एवं उसकी सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पंत विवि के डीन सीबीएसएच डॉ एके गौड़ ने पानी को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि पानी को संरक्षित करने से पेयजल जनित बीमारियों पर प्रभावी रोक लगायी जा सकती है। उन्होंने जल गुणवत्ता को बेहतर बनाने में पेयजल स्रोतों की जल संरक्षा व सुरक्षा को जरूरी बताया।
विवि के निदेशक शोध प्रसार प्रोफेसर एके शर्मा ने कृषि में जल के न्यूनतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होने बताया कि एक किग्रा धान की उत्पादन में 2500 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है तथा जल के महत्व को समझतेे हुए भविष्य के लिए जल संरक्षित करने की आवश्यकता बतायी। कार्यशाला समन्वयक एवं डीएवीपीजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रशान्त सिंह ने बताया कि अब तक प्रदेश के 26 में से 10 जल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं को एनएबीएल की मान्यता प्राप्त हो चुकी है तथा शेष तीन प्रयोगशालाओं का शीघ्र ही प्रमाणीकरण हो जायेगा।
पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरके श्रीवास्तव ने कहा कि अपशिष्ट जल के शोधन द्वारा जल का संरक्षण एवं सुरक्षा की जानी बेहद जरूरी है। उन्होंने भविष्य में खराब जल गुणवत्ता व जल संकट से होने वाले समस्याओं पर जानकारी दी।
बायोटेक हल्दी के वैज्ञानिक डॉ मणिन्द्र मोहन शर्मा ने अपने तकनीकी व्याख्यान में तराई के विभिन्न पेय जलस्रोतो की माइक्रोबियल डायवर्सिटी व गुणवत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला।
जल संस्थान, देहरादून की राज्य एनएबीएल लैब के तकनीकी प्रबंधक डॉ विकास कण्डारी एवं वरिष्ठ प्रोजेक्ट फेलो अर्चित पाण्डेय, ने फील्ड टेस्टिंग किट के जरिये प्रतिभागियों को जलगुणवत्ता के सभी भौतिक-रसायनिक एवं जैविक मानकों का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण में डॉ श्वेता सारस्वत, डॉ जेपीएन राय, डॉ प्रीति चतुर्वेदी, मोनिका छिमवाल, शिओम, निखिल, दीक्षा पाण्डे, जितेन्द्र सिंह सहित लगभग 125 छात्र-छात्राओं ने इस कार्यशाला में भाग लिया।



