भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। शहर की नजूल बस्ती पर मालिकाना हक और दान पात्र की भूमि के स्थाई समाधान को लेकर भाईचारा एकता मंच द्आंवारा चलाया जा रहा आंदोलन जोर पकड़ता दिख रहा है। बीते दो वर्षों से नजूल भूमि पर काबिज़ लोगों को मालिकाना हक दिलाए जाने की मांग करते संगठन ने अब मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया है।
मंच के केंद्रीय अध्यक्ष केपी गंगवार ने कहा कि शहर की नजूल बस्तियों में काबिज लोगों को मालिकाना हक देने की मांग लगभग 10 वर्षों से हो रही है। सरकार चुनाव के समय पर मालिकाना हक देने का वादा करती है लेकिन बाद में अपने वादे भूल जाती है। विगत विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और नगर निगम के चुनाव में भाजपा सरकार के नुमाइंदों व जनप्रतिनिधियों ने मालिकाना हक देने के लिए 6 महीने की अवधि तय की थी। मगर चार वर्ष से अधिक का समय बीतने पर भी शहर की नजूल बस्ती पर मालिकाना हक सिर्फ कागजों में और बयानों में ही दिया जा रहा है। जमीनी स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। वहीं दानपात्र की भूमि पर रह रहे लोगों को भी हक न मिलने से उनको अपने आशियाने उजड़ने का डर है। भाईचारा एकता मंच अब इस मामले में शहर की हर बस्ती और हर वार्ड में जाकर मशाल जुलूस निकालेगा। नजूल के सभी बस्ती वासियों को मंच की मुहिम में शामिल कर इस आंदोलन को उग्र रूप दिया जायेगा। गंगवार के कहा कि जब तक नजूल की भूमि पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता और दान पात्र की जमीन का स्थाई समाधान नहीं हो जाता मंच की यह लड़ाई जारी रहेगी।



