भोंपूराम खबरी रुद्रपुर। केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ 136 दिनों से दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने अप्रैल माह की रणनीति तैयार कर ली है। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने भोंपूराम खबरी पोर्टल से वार्ता करते हुए इस नयी रणनीति का खुलासा किया।
बाजवा ने बताया कि शनिवार को केएमपी राष्ट्रीय राजमार्ग सफलतापूर्वक जाम करने के बाद 13 अप्रैल को दिल्ली की सीमाओं पर सभी आंदोलन स्थलों पर खालसा पंथ का स्थापना दिवस मनाया जाएगा और साथ ही जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी पर शहीदों के सम्मान में कार्यक्रम होंगे। 14 अप्रैल को ‘संविधान बचाओ दिवस’ और ‘किसान बहुजन एकता दिवस’ मनाया जाएगा। इस दिन मोर्चा की सभी स्टेज बहुजन समाज के आंदोलनकारी चलाएंगे व सभी वक्ता भी बहुजन होंगे।
किसानों के आंदोलन में स्थानीयों की भागीदारी व उनके समर्पण का सम्मान करते हुए 18 अप्रैल को सभी मोर्चों पर आसपास के निवासियों का सम्मान किया जाएगा व उस दिन मंच संचालन का जिम्मेदारी भी स्थानीय लोगों को ही को दी जाएगी। 20 अप्रैल को धन्ना भगत की जयंती पर उनके गांव धोआ कलां से दिल्ली की सीमाओं पर मिट्टी लायी जाएगी व उनकी याद में टिकरी बॉर्डर मोर्चे पर कार्यक्रम होंगे। 24 अप्रैल को आंदोलन के 150 दिन होने पर एक हफ्ते के विशेष कार्यक्रम होंगे जिनमें किसानों मजदूरों के साथ साथ कर्मचारी, विद्यार्थी, नौजवान, कारोबारी व अन्य संगठनों को दिल्ली मोर्चा में शामिल होने का आह्वान किया जाएगा।
बाजवा ने बताया कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह में देशभर में किसान आंदोलन को समर्थन देने वाले संगठनों की कन्वेंशन की जाएगी जिसमें इस आंदोलन को देशव्यापी तेज करने की योजना बनाई जाएगी।
बाजवा ने कहा कि किसान नेता राकेश टिकैत सहित मोर्चा के सभी बड़े नेता उत्तर प्रदेश, उतराखण्ड, राजस्थान व अन्य जगहों के मतदाताओं से अपील करते हैं कि आने वाले स्थानीय चुनाव में भाजपा व इसके सहयोगी दलों को वोट न देकर उन्हें राजनीतिक सजा दे। भाजपा व इसके सहयोगी दलों की बेशर्मी का नतीजा है कि किसान 4 महीनों से ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे है। लेकिन कॉर्पोरेट घरानों को लाभ देने के लिए देश के कृषक वर्ग को खत्म करने का कुचक्र रचा जा रहा है।



