भोंपूराम खबरी, पंतनगर। विधायक राजेश शुक्ला ने पंतनगर स्थित शहीद चौक पहुंचकर 13 अप्रैल 1978 को शहीद हुए पंतनगर विश्वविद्यालय के शहीद श्रमिकों व कर्मचारियों को शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने देश की आजादी के संग्राम में 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला कांड में शहीद हुए स्वाधीनता संग्राम के बलिदानियों को भी स्मरण करते हुए उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि आज से 40 वर्ष पूर्व मजदूरों की समस्याओं के लिए संघर्ष करते हुए शहीद हुए मजदूरों को शहीद चौक पर विश्वविद्यालय के मजदूर एकत्रित होकर अपनी श्रद्धांजलि देते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान भी पंतनगर विश्वविद्यालय के मजदूरों के सामने विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो गई थी। जिसका सरकार के सहयोग से समाधान हो रहा है और निश्चित रूप से जिन उद्देश्यों के लिए हमारे मजदूर साथी शहीद हुए थे। उनके सपनों को साकार करते हुए मजदूरों की समस्याओं का समाधान आवश्यक है, उन्होंने कहा कि जल्दी ही 2003 से पूर्व के कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं का भी निस्तारण सरकार के हस्तक्षेप से हो जाएगा। शहीद हुए मजदूरों के गोलीकांड की घटना का जिक्र करते हुए विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि वर्षों पूर्व जब यह कांड 1978 में हुआ था तब उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं तराई के संस्थापक स्वर्गीय पंडित रामसुमेर शुक्ला ने सबसे पहले कफ्र्यू तोड़कर परिवारों की सुध ली थी।
इंटक जिलाध्यक्ष एवं मोर्चे के अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने संबोधित करते हुए कहा की मेहनतकश मजदूरों पर जो अपनी मांगों के लिए इकट्ठे हुए थे उस पर बर्बरता पूर्वक गोली चलाई गई जो यह दर्शाता है कि पूर्ववर्ती सरकार है या वर्तमान सरकार हमेशा मजदूरों का शोषण करती है और आवाज उठाने पर पुलिसिया दमन की कार्यवाही करती है जो घोर निंदनीय है।इस दौरान शहीद श्रमिकों को श्रद्धांजलि देने वालो में एएम खान, जनार्दन सिंह, विवेक सक्सेना, ओएन गुप्ता, त्रिलोकी शंकर मिश्रा, संतोष कुमार, शैलेंद्र मिश्रा, मनोज कुमार, नरेंद्र कुमार, ओएन गुप्ता, केपी सिंह, नरेंद्र कुमार, शशिकांत मिश्रा, जगदीश, मोनू गुप्ता, मोहम्मद अजीज, अभिमन्यु चैबे, अंगद यादव, राजू ठाकुर, उमेश कुमार, कमलेश कुमार, सुदामा प्रसाद, कुलवंत सिंह, आरके शर्मा, डीएन यादव, शेर सिंह समेत सैकड़ों श्रमिक मजदूर मौजूद थे।



