भोंपूराम खबरी, रुद्रपुर। उत्तरप्रदेश लोकतंत्र सेनानी संघ के महासचिव एडवोकेट सुभाष छाबड़ा ने आपातकालीन बंदियों के प्रति केंद्र सरकार के रवैये को निराशाजनक बताया है। छाबड़ा ने कहा कि आये दिन आपातकालीन बंदियों के योगदान पर चर्चा की जाती है मगर उनके भले के लिए कुछ नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा कि साल 1975 में अनेक लोगों ने अपना भविष्य और जीवन दांव पर लगाते हुए 18 महीने तक की जेल काटी तथा विभिन्न प्रकार की यातनाएं सहन की। यह सब जानते हुए भी केंद्र सरकार द्वारा कोई कदम ना उठाना उसकी नीयत पर संदेह उत्पन्न करता है। ऐसा लगता है सरकार दिखावा कर रही है और लोकतंत्र सेनानियों के प्रति कोई सम्मान की भावना नहीं है। छाबड़ा ने कहा कि इस मामले में मोदी सरकार को मुलायम सिंह यादव के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिये। जिन्होंने बिना किसी दलीय भेदभाव के लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान दे दिया। आपातकाल में सबसे ज्यादा लोग संघ के ही थे जिन्होंने ज़ुल्म सहे और इसके बाद समाजवादी कार्यकर्ता थे। समाजवादी नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को 1977 और 1989 के चुनावों में भरपूर अवसर दिया जबकि भाजपा ने अपने संघर्षशील कार्यकर्ताओं को नैपथ्य में भेज दिया जो जीवन यापन के लिये भी जूझते नज़र आए। केंद्र सरकार को इस मामले में ठोस कदम उठाना चाहिये। आपातकाल में संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानी अब उम्र के अंतिम पड़ाव पर हैं उन्हें सुविधाएँ दी जानी चाहिए।



