Tuesday, March 24, 2026
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कौन होगा कांग्रेस का नया प्रदेशाध्यक्ष !!!!!

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भोंपूराम खबरी,रुद्रपुर। नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद विधानसभा में यह पद रिक्त हो गया है। सूबे में कांग्रेस के ग्यारह विधायक हैं और इनमें से जल्द ही किसी एक की नेता प्रतिपक्ष के तौर पर ताजपोशी की जानी संवैधानिक रूप से आवश्यक है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह को पार्टी हाईकमान नेता प्रतिपक्ष का पद दे सकता है। चकराता से विधायक प्रीतम सिंह के नेता प्रतिपक्ष बनने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद रिक्त हो जायेगा। चर्चा है कि प्रीतम सिंह के बाद पार्टी प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे पर दांव खेल सकती है।

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों की मानें तो प्रीतम सिंह का नेता प्रतिपक्ष बनना जहाँ तय हो चुका है तो प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए तिलक राज बेहड़ सहित पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा और पूर्व राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश जोशी का नाम दौड़ में है। यहाँ गौरतलब है कि बेहड़ के नाम को स्वयं वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आगे किया है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि पहाड़ी प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने पहली बार गैर पर्वतीय मदन कौशिक को प्रदेशाध्यक्ष का पद देकर नई परिपाटी की शुरुआत की है और कांग्रेस भी उसी के पदचिह्नों पर चलते हुए पार्टी में जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर नया सन्देश देना चाहती है।

लेकिन कांग्रेस और भाजपा के संगठनात्मक ढ़ांचे में आमूलचूल परिवर्तन होने के कारण पहाड़ी प्रदेश में गैर-पर्वतीय व्यक्ति का प्रदेशाध्यक्ष बनना संभव नहीं दिखता। जहाँ भाजपा हाईकमान प्रधान पार्टी है और वरिष्ठ नेताओं के हर निर्णय को बेमन से ही सही मगर स्वीकारा जाता है तो कांग्रेस व्यक्तिवाद से अब तक ऊपर नहीं उठ पायी है। ऐसे में बेहड़ का प्रदेशाध्यक्ष बनना पार्टी के कुमाऊं और गढ़वाल के अनेक नेताओं को नागवार गुजर सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि जिस पंजाबी महासभा के बेहड़ प्रदेशाध्यक्ष हैं वह पंजाबी समुदाय मात्र देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में ही सीमित है।

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता की संजीवनी पाने का प्रयास कर रही है। असी में यदि प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष बनते हैं तो कांग्रेस को प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए सोच-समझकर नाम तय करना होगा। जातिगत समीकरणों में उलझे प्रदेश और साथ ही यहाँ कांग्रेस की कार्यकर्ताओं के द्वारा ही चलने की विवशता इस पद पर किसी पर्वतीय मूल के व्यक्ति की नियुक्ति होने का ही अंदेशा जगाती है।

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